चन्द्रयान उत्सव : भारत का अन्तरिक्ष मिशन - चन्द्रयान [1.9HS] 8800440559

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कोड

1.9 एचएस

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अक्तबू र 2023 अि न 1945 PD 1T RPS

© रा ट्रीय शैिक्षक अनुसध ं ान और प्रिशक्षण पिरषद् 2023

िवषय

चंद्रयान उ सव

1.0

1.1

एफ

हमारा चद्रं यान

1.2

पी

मेरा यारा चदं ा: रानी की खोज

1.3

एम

चद्रं मा पर भारत का अिभयान

1.4

एस

चद्रं यान: चद्रं मा की ओर यात्रा

1.5

एस

1.6

एस

भारत के चद्रं िमशन की खोज चद्रं मा की ओर और उससे आगे

1.7

एस

भारत का चद्रं िमशन: चद्रं यान-3 को जान

1.8

एचएस

चद्रं मा पर भारत

1.9

एचएस

भारत का अतं िरक्ष िमशन: चद्रं यान

1.10 एचएस

चद्रं यान-3 की भौितकी

अपना चद्रं यान से संबंिधत गितिविधय म भाग लेने के िलए: िविजट कर: www.bhartonthemoon.ncert.gov.in प्रकाशन प्रभाग म सिचव, रा ट्रीय शैिक्षक अनुसंधान और प्रिशक्षण पिरषद,् ी अरिवंद मागर्, नई िद ली 110 016 द्वारा प्रकािशत तथा गीता ऑफ़सेट िप्रंटसर् प्रा. िल., सी–90, एवं सी–86, एवं सी-86, ओखला इडं ि ट्रयल एिरया, फे ़ज़–I, नई िद ली 110 020 द्वारा मिु द्रत ।

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अिधक जानकारी के िलए: ईमेल: [email protected] पीमईिवद्या आईवीआरएस: 8800440559

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भारत का अंतिरक्ष िमशन: चंद्रयान उ चतर मा यिमक तर

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भारत का अतं िरक्ष िमशन: चद्रं यान

अतं िरक्ष िमशन : चद्रं यान एक िदन परू ी कक्षा के छात्र ने समाचार पत्र , पित्रकाओ,ं टेलीिवजन, सोशल मीिडया आिद म हर जगह हमारे देश के अतं िरक्ष िमशन के बारे म इतना कुछ देखने और सनु ने के बाद सामा य प से हमारे देश के अतं िरक्ष िमशन और िवशेष प से चद्रं यान के बारे म और अिधक जानने के िलए उ सक ु थे। िशक्षक भी छात्र के बीच मनोरंजक चचार् शु करने के िलए उ सक ु और उ सािहत हुए।

अतं िरक्ष कायर्क्रम डॉ. िवक्रम ए. साराभाई, भारत के अतं िरक्ष कायर्क्रम के जनक: 61 साल पहले 1962 म भारत के अतं िरक्ष कायर्क्रम के जनक डॉ. िवक्रम ए. साराभाई के सशक्त नेतृ व म भारतीय रा ट्रीय अतं िरक्ष अनसु ंधान सिमित (INCOSPAR) की थापना के साथ शु हुआ था। उसी वषर् ित वनंतपरु म के पास थु बा इक्वेटोिरयल रॉके ट लॉि चगं टेशन भी थािपत िकया गया । भारत का अतं िरक्ष कायर्क्रम दिु नया के सबसे परु ाने कायर्क्रम म से एक है और इसने रा ट्रीय िवकास म मह वपणू र् भिू मका िनभाई है। भारत ने अब तक 125 अतं िरक्ष यान िमशन को सफलतापवू र्क परू ा िकया है, िजसम तीन नैनो उपग्रह और एक माइक्रोसैटेलाइट शािमल ह; 94 लॉ च िमशन; दो पनु : प्रवेश िमशन; 34 देश से संबंिधत 431 िवदेशी उपग्रह; छात्र द्वारा 15 उपग्रह; और तीन उपग्रह को भारतीय िनजी कंपिनय द्वारा तैयार िकया गया। इनम 53 भारतीय उपग्रह पृ वी की िनचली कक्षाओ ं 3

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चद्रं यान उ सव

भारत के अतं िरक्ष कायर्क्रम के जनक िवक्रम साराभाई

(एलईओ) और भतू ु यकािलक पृ वी कक्षाओ ं (जीईओ) म ह। भारत ने मगं ल और चद्रं मा के िलए भी िमशन शु िकए ह। भारत ने हाल ही म चद्रं यान-3 को सफलतापवू र्क लॉ च िकया है उ मीद है िक यह उपग्रह जनवरी 2024 म िकसी समय सयू र् और पृ वी के बीच ि थर बने रहने के िलए अपने िनधार्िरत थान, लैगरज-1 (एल 1) तक पहुचं जाएगा। भारत ज द ही शायद 2023 के अतं म या 2024 की शु आत म एक भारतीय नागिरक को ‘िलयो’ भेजने की योजना बना रहा है। इस िमशन को ‘गगनयान’ के नाम से जाना जाता है। भारतीय अतं िरक्ष कायर्क्रम बहुत कम कीमत पर िमशन लॉ च करने म अपनी िवशेषज्ञता के िलए भी जाना जाता है।

इसरो और इसकी इकाइयाँ अब छात्र अतं िरक्ष अ वेषण और अनसु ंधान की ि थित के बारे म जानने के बाद, हमारे देश की अतं िरक्ष एजसी, इसरो और इसकी घटक इकाइय और उनके संबंिधत थान के बारे म जानने के िलए उ सक ु ह। कक्षा ने इसकी खोज शु की और यह िववरण तैयार िकया— भारतीय अतं िरक्ष अनसु धं ान सगं ठन (इसरो) की थापना 15 अग त, 1969 को हुई थी। इसे अतं िरक्ष प्रौद्योिगकी का उपयोग करने के िलए एक िव तािरत भिू मका के साथ INCOSPAR की जगह बनाया गया। बाद म 1972 म भारत सरकार ने अतं िरक्ष आयोग का गठन िकया और अतं िरक्ष िवभाग की थापना की, िजसके तहत इसरो को लाया गया। इसरो को अब भारत की अतं िरक्ष एजसी के प म जाना जाता है। अतं िरक्ष आयोग सामािजक-आिथर्क, संचार, टेलीिवजन प्रसारण और मौसम सबं ंधी सेवाओ,ं ससं ाधन िनगरानी और प्रबंधन, अतं िरक्षआधािरत नेिवगेशन सेवाओ,ं तकनीकी और ग्रह की खोज आिद सिहत िविभ न रा ट्रीय आव यकताओ ं के िलए अतं िरक्ष िवज्ञान और प्रौद्योिगकी के िवकास और अनप्रु योग को 4

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भारत का अतं िरक्ष िमशन: चद्रं यान

बढ़ावा देने के िलए नीितय को तैयार करता है और भारतीय अतं िरक्ष कायर्क्रम के कायार् वयन की देखरे ख करता है। इन कायर्क्रम को अतं िरक्ष िवभाग मख्ु य प से इसरो और इसकी घटक इकाइय के मा यम से कायार्ि वत करता है। इसरो का मख्ु यालय बगलु म है। इसकी गितिविधयां िविभ न कद्र और इकाइय म फै ली हुई ह। प्र येक इकाई को अपना काम करने के िलए एक िविश िदशािनदेर्श िदया गया है। लॉ च वाहन िवक्रम साराभाई अतं िरक्ष कद्र (वीएसएससी), ित वनंतपरु म म बनाए गए ह; उपग्रह को यू आर राव उपग्रह कद्र (यआ ू रएससी), बगलु म िडजाइन और िवकिसत िकया गया है; सतीश धवन अतं िरक्ष कद्र (एसडीएससी) ीहिरकोटा (एसएचएआर) से उपग्रह और प्रक्षेपण वाहन का एकीकरण और प्रक्षेपण िकया जाता है; तरल प्रणोदन प्रणाली कद्र (एलपीएससी), वािलयामाला और बगलु म क्रायोजेिनक चरण सिहत तरल चरण का िवकास िकया जाता

है; अतं िरक्ष अनप्रु योग कद्र (एसएसी), अहमदाबाद म संचार और सदु रू संवेदन उपग्रह और अतं िरक्ष प्रौद्योिगकी के अनप्रु योग पहलओ ु ं के िलए ससर शु िकए गए ह और िरमोट सिसगं उपग्रह डेटा अिभग्रहण प्रसं करण और प्रसार का कायर् रा ट्रीय सदु रू संवेदन कद्र (एनआरएससी), हैदराबाद को स पा गया है। इसरो के कई अ य कद्र और इकाइयां ह। इनम अतं िरक्ष िवभाग और इसरो मख्ु यालय मानव अतं िरक्ष उड़ान कद्र (एचएसएफसी), भारतीय सदु रू संवेदन सं थान 5

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चद्रं यान उ सव

(आईआईआरएस), इसरो जड़ वीय प्रणाली इकाई (आईआईएसय)ू , इसरो प्रणोदन का लेक्स (आईपीआरसी) इसरो टेलीमेट्री, ट्रैिकंग एडं कमांड नेटवकर् (आईएसटीआरएसी), इलेक्ट्रोऑि टक्स िस टम प्रयोगशाला (एलईओएस), तरल प्रणोदन प्रणाली कद्र (एलपीएससी), और मा टर िनयंत्रण सिु वधा (एमसीएफ) शािमल ह । इसरो के पास अपनी सहायक इकाइयां भी ह, जैसे िक इिं डयन नेशनल पेस प्रोमोशन एडं ऑथोराइजेशन सटर (इन- पेस) और सट्रल पि लक सेक्टर एटं रप्राइजेज (सीपीएसई), एिं ट्रक्स कॉप रे शन िलिमटेड और यू पेस इिं डया िलिमटेड (एनएसआईएल)। इसरो के त वावधान म यह चार वाय िनकाय काम कर रहे ह: भारतीय अतं िरक्ष िवज्ञान और प्रौद्योिगकी सं थान (आईआईएसटी), ित वनंतपरु म; रा ट्रीय वायमु डं लीय अनसु धं ान प्रयोगशाला (एनएआरएल), ित पित; उ र पवू ीर् अतं िरक्ष अनप्रु योग कद्र (एनई-एसएसी), री भोई, मेघालय; और भौितक अनसु ंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) अहमदाबाद।

भारतीय अतं िरक्ष कायर्क्रम और इसकी अब तक की यात्रा अब छात्र इसके बारे म जानने के िलए उ सक ु ह िक इसरो ने अब तक िकतनी प्रगित की है और अब तक इसने क्या िकया है। इसरो और अ य एजिसयां इसे आगे बढ़ाने के िलए कै से योजना बना रही ह? मासर् ऑिबर्टर िमशन और आिद य L1 के बारे म क्या हो रहा है? भारतीय अतं िरक्ष कायर्क्रम की जड़ रा ट्रवाद, उद्यमशीलता और रा ट्रीय सरु क्षा म िनिहत है। रा ट्रवाद म आव यक प से रा ट्र-िनमार्ण, शासन वैधता, आतं िरक रा ट्रीय िवकास और बाह्य ि थित शािमल है। अतं िरक्ष क्षेत्र को हमेशा रा ट्र िनमार्ण के िलए वैज्ञािनक ि कोण िवकिसत करने के प्रमख ु साधन के प म देखा गया है। वतंत्र भारत की सभी सरकार ने अतं िरक्ष क्षमता के िवकास को हमेशा से सव च प्राथिमकता दी है । प्रधानमत्रं ी ी नरद्र मोदी की आकांक्षाओ ं को आकार देने म अतं िरक्ष क्षेत्र ने अपनी अहम् भिू मका िनभानी जारी रखी है। उ ह ने हमेशा भारत के रा ट्रीय िवकास के िलए अतं िरक्ष के मह व पर प्रकाश डाला है। वे यिक्तगत प से अतं िरक्ष क्षेत्र सधु ार और भारत के अतं िरक्ष क्षेत्र के वािणि यक िवकास म प्रगित पर यान देते 6

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रहे ह। मौजदू ा सरकार को भारत म कम लागत वाले लॉ च िस टम िवकिसत करने म महारत हािसल करने का गौरव प्रा त है, चाहे वह मगं ल िमशन हो, चद्रं िमशन - चद्रं यान, या सौर िमशन आिद य-एल 1 हो। यह यान देने योग्य है िक भारत ने अतं िरक्ष क्षमता म एक उद्यमी की भिू मका िनभाई है। वतर्मान समय म, इसरो की वािणि यक शाखा, एिं ट्रक्स कॉप रे शन िलिमटेड और सावर्जिनक-िनजी क्र ए के प िस टम भागीदारी म यू पेस इिं डया िलिमटेड (एनएसआईएल) (सीईएस) की थापना के मा यम से न के वल भारतीय अतं िरक्ष प्रौद्योिगकी के िलए एक वैि क ग्राहक आधार बनाने कक्षीम मॉडयल ू बि क िनजी क्षेत्र म नवाचार की वतंत्रता िवकिसत करने (आतं िरक) के िलए भी प्रयास जारी है। वतर्मान सरकार के ि कोण के अनु प, सरकार की भिू मका एक सहायक के प म होनी चािहए, जो अतं िरक्ष क्षेत्र को प्रगित के िलए एक क्रामोजेिनक चरण संसाधन के प म मा यता देती है। इस प्रकार, अतं िरक्ष (C25-G) क्षेत्र का अथर् देशवािसय के िलए उ कृ ट मानिचत्रण, प्रितिब बन और संयोजकता कीे सिु वधाएं ह गी। अतं िरक्ष क्षेत्र म प्राकृ ितक आपदाओ ं के उ कृ ट पवू ार्नमु ान, तरल अव था उद्यिमय के िलए नौपिरवहन से प्रदायगी तक उ कृ ट (L110-G) गित, उ कृ ट नौपिरवहन और सरु क्षा की भी पिरक पना ठोस प्रणोदन की गई है। भारतीय अतं िरक्ष उद्यमशीलता कायर्क्रम का (HS-200) वैि क अतं िरक्ष उद्योग के िलए एक प्रमख ु लाभ अिजर्त करने वाली सं था बनने की आशा है। रा ट्रीय सरु क्षा म अतं िरक्ष प्रौद्योिगकी का पता लगाने की आव यकता, जैसे िक परमाणु कमान, िनयंत्रण और संचार म; सै य कमान और िनयंत्रण; भमू डं लीय ि थित िनधार्रण प्रणाली; नौसंचालन; िपछले दो दशक म खिु फया िनगरानी और टोही काय आिद म बहुत अिधक उ नित हुई है। ‘आकाश म आख ं ’ या उपग्रह िनगरानी के िवकास से िकसी भी घसु पैठ के रणनीितक पवू ार्नमु ान और मानिचत्रण या सीमावतीर् क्षेत्र म सै य बिु नयादी संरचना के िनमार्ण म वृिद्ध होती है। भारत के अतं िरक्ष कायर्क्रम के िलए 2025 के पिर य म पिरक पना की गई है: (i) ग्रामीण सयं ोजकता, सरु क्षा आव यकताओ ं और मोबाइल सेवाओ ं के िलए उपग्रह-आधािरत संचार और नौपिरवहन प्रणाली िवकिसत करना; (ii) प्राकृ ितक संसाधन , मौसम के प्रबंधन के िलए मानिचत्रण क्षमता म वृिद्ध करना और जलवायु पिरवतर्न अ ययन म सहायता करना; 7

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(iii) सौर मडं ल और ब्र ांड को और अिधक समझने के िलए अतं िरक्ष िवज्ञान अिभयान का िवकास; (iv) भारी उ थापक प्रक्षेपक लांचर क्षमता िवकिसत करना; (v) पनु : प्रयो य प्रक्षेपण यान का िवकास; और (vi) मानव उड़ान कायर्क्रम िवकिसत करना।

गितिविध-1 हम इन अतं िरक्ष अिभयान , हमारे देश की अतं िरक्ष सं था, इसरो, और इसकी अब तक की यात्रा के बारे म जानने के प चात,् अतं िरक्ष अनसु ंधान म अपने प्रयास की वतर्मान गितिविधय पर यान किद्रत करने की आव यकता है। आइए देखते ह।

गगनयान गगनयान पिरयोजना म तीन िदवसीय िमशन के िलए 400 िक.मी. की कक्षा म तीन सद य के चालक दल को लॉ च करके और भारतीय समद्रु ी जल म उतर कर उ ह पृ वी पर सरु िक्षत प से वापस लाकर मानव अतं िरक्ष यान क्षमता का प्रदशर्न करने की पिरक पना की गई है। वा तिवक मानव अतं िरक्ष उड़ान िमशन को परू ा करने से पहले, इसरो प्रौद्योिगकी तैयािरय के तर को प्रदिशर्त करने की योजना बना रहा है। इन प्रदशर्क िमशन म एकीकृ त एयर ड्रॉप टे ट (आईएडीटी), पैड एबॉटर् टे ट (पीएटी), और टे ट हीकल (टीवी) उड़ान शािमल ह। सभी प्रणािलय की सरु क्षा और िव सनीयता मानव यक्त ु िमशन से पहले मानव रिहत िमशन म िसद्ध की जाएगी। कायर्क्रम की प्रभावी िनगरानी और कायार् वयन के िलए, एक नया इसरो मानव अतं िरक्ष यान कद्र (एचएसएफसी) बनाया गया है।

सचं ार भारतीय आकाश के ऊपर, 17 संचार उपग्रह का एक समहू टेलीिवजन प्रसारण, डायरे क्ट-टूहोम (डीटीएच) टेलीिवजन सेवाओ,ं दरू संचार, बहुत छोटे एपचर्र टिमर्नल , रे िडयो नेटविकग, सामिरक संचार और बड़े पैमाने पर समाज सेवा करने वाले अनप्रु योग सिहत मह वपणू र् सेवाओ ं की एक ृंखला का समथर्न करने म मह वपणू र् भिू मका िनभाता है। इन ट्रांसप डर के उ लेखनीय प्रयोक्ताओ ं म सरकारी और रणनीितक सं थाएं, प्रसार भारती, डीटीएच और टेलीिवजन सेवा प्रदाता, सावर्जिनक क्षेत्र के संगठन जैसे बीएसएनएल, ओएनजीसी, एएआई, 8

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ईसीआईएल, िनजी वीसैट ऑपरे टर, साथ ही बिकंग और िव ीय सं थान शािमल ह। ये संचार उपग्रह सी-बड, िव तािरत सी-बड, के य-ू बड, के ए/के यू बड और एस-बड सिहत िविभ न आवृि बड्स म फै ले प्रषग्राही से ससु ि जत ह। अतं िरक्ष िवभाग और इसरो आव यकता-आधािरत टेलीमेिडिसन, टेलीएजक ु े शन और आपदा प्रबंधन गितिविधय म अनक ु ू िलत सामािजक प्रयास का भी समथर्न करते ह।

अतं िरक्ष पिरवहन प्रणाली भारतीय अतं िरक्ष कायर्क्रम प्रौद्योिगकी अिधग्रहण और प्रक्षेपण वाहन के िवकास के संदभर् म सफलतापवू र्क िवकिसत हुआ है। ध्रवु ीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) ने िविभ न देश के उपग्रह को लोकािपर्त करने और अभतू पवू र् अतं ररा ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के िलए एक िव सनीय और लागत प्रभावी िवक प के प म लोकिप्रयता हािसल की है। इसके अलावा, िजयोिसक्र ं ोनस सैटेलाइट लॉ च हीकल (जीएसएलवी), जो वदेशी क्रायोजेिनक चरण से ससु ि जत है, मख्ु य प से संचार उपग्रह के िलए उपयोग िकए जाने वाले एक पिरचालन वाहन म पिरवितर्त हो गया है। इस उपलि ध ने भारत को अतं िरक्ष पिरवहन म आ मिनभर्रता की ओर अग्रसर िकया है, और पीएसएलवी और जीएसएलवी के उपयोग से पृ वी अवलोकन, संचार, नौपिरवहन और अतं िरक्ष अ वेषण जैसे उ े य के िलए उपग्रह के प्रक्षेपण को सक्षम बनाया है। 9

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ग्रह का अनसु ंधान ए ट्रोसैट - भारत की पहली खगोलीय अतं िरक्ष वेधशाला, एक उपग्रह के उपयोग द्वारा िविभ न खगोलीय सं थाओ ं के समवतीर्, बहु-तरंग दै यर् अवलोकन की सिु वधा प्रदान करती है। ए ट्रोसैट के साथ की गई कुछ उ लेखनीय खोज ह: (i) दरू थ आकाशगगं ाओ ं से िनकलने वाले पराबगनी उ सजर्न का पता लगाना; (ii) तारा समहू और आस-पास की आकाशगंगाओ ं से िव तािरत पराबगनी उ सजर्न को दशार्ने वाले उ च-िवभेदन वाले छायािचत्र लेना; (iii) हमारी आकाशगगं ा के एक्स-रे ोत के अदं र मह वपणू र् वणर्क्रमीय िवशेषताओ ं की पहचान, एक् ट्रागैलेिक्टक क्षेत्र म गितिविधय का यापक बहु-तरंग दै यर् आ छादनीयता; और (iv) समीपवतीर् अिधनवतारा अवशेष म एक्स-रे का ध्रवु ीकरण। एक अतं रग्रहीय अतं िरक्ष यान प्रयास, मासर् ऑिबर्टर िमशन (एमओएम) ने मगं ल ग्रह के चार ओर कक्षा म अपना छठवां वषर् सफलतापवू र्क परू ा कर िलया है। अतं िरक्ष यान से प्रा आक ु ं का वैज्ञािनक िव े षण जारी है। ं ड़ से मगं ल ग्रह के िविभ न पहलओ चद्रं अ वेषण के क्षेत्र म, अगला खडं चद्रं यान िमशन से सबं ंिधत है।

सयू र् का अ ययन – आिद य एल-1 अिभयान : सयू र् हमारे सौर मडं ल की सबसे बड़ी और सबसे भारी व तु है, जो पृ वी से लगभग 15 करोड़ िकलोमीटर दरू है। यह हाइड्रोजन और हीिलयम गैस का एक गमर्, चमकता हुआ गोला है। सयू र् के कद्र का तापमान लगभग 1.5 करोड़ के ि वन से अिधक होने का अनमु ान है। सयू र् की िदखाई देने वाली सतह, फोटो फीयर, लगभग 5500 के ि वन पर अपेक्षाकृ त ठंडी है। इसकी अनमु ािनत उम्र लगभग 4.5 अरब वषर् है। यह एक बहुत ही गितशील तारा है। भारत ने सयू र् का अ ययन करने के िलए 2 िसतंबर, 2023 को सतीश धवन अतं िरक्ष कद्र (एसडीएससी), ीहिरकोटा से अपनी पहली अतं िरक्ष-आधािरत वेधशाला, आिद य-एल 1 िमशन लॉ च िकया है। अतं िरक्ष यान को शु म िलयो म रखा गया था। इसके बाद, इसे 256 x 121973 िक.मी. पर कक्षा पर थािपत करने के िलए 15 िसतंबर, 2023 को चार बार सफलतापवू र्क पवू ार् यास िकया गया था। अतं िरक्ष यान 19 िसतंबर, 2023 को पृ वी के गु वाकषर्ण प्रभाव क्षेत्र से बाहर िनकल गया और लैगरज िबंदु एल 1 की यात्रा शु की । उ मीद की जा रही है िक अतं िरक्ष यान जनवरी 2024 म एल1 पर पहुचं जाएगा, जो पृ वी से 15 लाख िकलोमीटर दरू है। सयू र्-पृ वी प्रणाली म, पांच लैगरज िबंदु ह : एल 1, एल 2, एल 3, एल 4, और एल 5, इन िबंदओ ु ं पर, अतं िरक्ष यान 10

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पर सयू र् और पृ वी का सयू र् और पृ वी का गु वाकषर्ण िखचं ाव अतं िरक्ष यान को थानांतिरत करने के िलए आव यक अिभकिद्रत (सिट्रपेटल) बल के बराबर होगा। यान द िक एल 1, एल 2, और एल 3 एक ही रे खा म ह, एल 1 और एल 2 पृ वी से समान दरू ी पर ह, जैसा िक िदखाया गया है, जबिक एल 4 और एल 5 समबाहु ित्रभजु का गठन करते ह। वेधशाला को एल 1 के चार ओर एक प्रभामडं ल कक्षा म रखा जाना है तािक यह िबना िकसी ग्रहण के सयू र् को लगातार देख सके । यह सिु नि त करे गा िक आिद य-एल 1 लगातार सौर गितिविधय का िनरीक्षण कर।

आिद य-L1 वेधशाला की यात्रा: एसडीएससी, ी हरीकोटा से सयू र्-पृ वी प्रणाली म लैगरज िब दु L1 के चार ओर प्रभामडं ल कक्षा तक।

सयू र्-पृ वी प्रणाली म लैगरज िब दु L1,L2,L3, L4 और L5 ह।

पृ वी का अ ययन अतं िरक्ष-आधािरत सिु वधाओ ं और अ य ोत से प्रा अवलोकन का उपयोग भिू म आवरण, वन पित, सतह और भजू ल, बफर् (या ग्लेिशयर), िमट्टी, आद्रर्भिू म, खिनज (या हाइड्रोकाबर्न) आिद जैसे संसाधन का आकलन करने के िलए िकया जाता है। इसके अितिरक्त, अ ययन सौर, हाइड्रो, अपतटीय पवन, और लहर ऊजार् जैसे नवीकरणीय (अक्षय) ऊजार् ोत तक फै ला हुआ है, साथ ही इसकी मदद से बंजर भिू म और भिू म क्षरण की िनगरानी भी की जाती है। फसल उ पादन का पवू ार्नमु ान लगाने, संभािवत मछली पकड़ने वाले क्षेत्र (पीएफजेड) की पहचान करने, बागवानी का आकलन करने और फसल बीमा कायर्क्रम का प्रबंधन करने के िलए उ नत तकनीक िवकिसत की गई है िजसम उपज मॉडिलंग और क्षित का आकलन शािमल है। इसके अलावा, िसचं ाई क्षमता उपयोग और जलाशय क्षमता के मू यांकन के िलए अतं िरक्ष-आधािरत आक ं ड़े मह वपणू र् है। आपदा प्रबंधन के सदं भर् म, इसरो द्वारा आपदा प्रबंधन सहायता (डीएमएस) कायर्क्रम भारत के अदं र प्रभावी आपदा प्रबंधन के िलए अतं िरक्ष-आधािरत सचू ना प्रदान करने म मह वपणू र् भिू मका िनभाता है। आपदा प्रबंधन के िलए इसरो की प्रितबद्धता अतं ररा ट्रीय तर पर भी या त है, क्य िक यह अतं िरक्ष और प्रमख ु आपदाओ ं के िलए अतं ररा ट्रीय घोषणापत्र का एक ह ताक्षरकतार् है। 11

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चद्रं यान उ सव

इसरो िविभ न भारतीय सदु रू संवेदी उपग्रह से उपग्रह के आक ं ड़े अिधग्रहण की योजना बनाकर और भारतीय सदु रू संवेदी आक ं ड़े के सेट प्रदान करते हुए देश म आपदा पिर य म सिक्रय प से भाग लेकर इस पहल का समथर्न करता है। इसके अलावा, इसरो ने भारत म पयार्वरणीय मापदडं पर पणू बर् ंदी उपाय के प्रभाव का िव े षण करने के िलए एक यापक वैज्ञािनक अ ययन भी िकया।

क्षमता िनमार्ण और वैि क सहयोग शानदार! कक्षा के अनेक छात्र ने पछ ू ा िक हम यह भी जानने के इ छुक ह िक हम इस प्रयास म कै से शािमल हो सकते ह। आइए हम कुछ हद तक शोध कर । हम वािणि यक (या आिथर्क) िनिहताथर् जानने के िलए भी उ सक ु ह! कक्षा म इसे पनु : दोहराया गया। अतं िरक्ष कायर्क्रम िविश ट ह और बहुत जोिखम वाले भी ह। इनकी िवफलता की लागत पारंपिरक क्षेत्र की तल ु ना म कई गनु ा अिधक होती है। इसिलए अतं िरक्ष अिभयान की क पना लगभग शू य त्रिु ट के साथ की जाती है। भारतीय अतं िरक्ष कायर्क्रम की उपलि धयां हमेशा मख्ु य प से अ छी तरह से थािपत गणु व ा मानक और समीक्षा प्रणाली और यावसाियकता के साथ प्रितबद्धता और समपर्ण के साथ गितिविधय को परू ा करने के कारण हािसल होती रही ह। िवभाग ने इस तरह की अनठू ी प्रितभाओ ं और प्रेरक िसद्धांत को पोिषत करने के मह व को पहचानते हुए हमेशा क्षमता-िनमार्ण से सबं ंिधत पहलओ ु ं पर जोर िदया है। क्षमता िनमार्ण म िवकास के कई क्षेत्र शािमल ह तािक यह सिु नि त िकया जा सके िक िवभाग क पना के अनसु ार अपने ल य को प्रा करता है। मानव संसाधन की क्षमता को बढ़ाने और भारतीय अतं िरक्ष कायर्क्रम की बढ़ती आव यकताओ ं को पणू र् करने हेत,ु भारतीय अतं िरक्ष िवज्ञान और प्रौद्योिगकी सं थान (आईआईएसटी) की थापना 2007 म ित वनंतपरु म म की गई । यह सं थान रा ट्र म अग्रणी है, जहां अतं िरक्ष िवज्ञान, अतं िरक्ष प्रौद्योिगकी और अतं िरक्ष अनप्रु योग से सबं ंिधत िवषय पर िवशेष जोर देने के साथ नातक, नातको र और शोध सिहत िविभ न तर पर शीषर् तरीय िशक्षा प्रदान की जाती है। इसरो कूली छात्र और संकाय सद य के िलए िविभ न गितिविधय का भी आयोजन करता है। ऐसे सभी क्षमता िनमार्ण कायर्क्रम का िववरण इसरो की वेबसाइट: www.isro.gov. in पर देखा जा सकता है। अतं ररा ट्रीय सहयोग भारत के अतं िरक्ष प्रयास का एक अिभ न अगं है, और इसरो अतं िरक्ष सं थान और संबंिधत संगठन के साथ िद्वपक्षीय और बहुपक्षीय संबंध को प्राथिमकता देना जारी रखता है। इसका उ े य नवीन वैज्ञािनक और तकनीकी चनु ौितय का समाधान करना, बाहरी अतं िरक्ष के शांितपणू र् उपयोग के िलए अतं ररा ट्रीय अवसंरचना की थापना करना, अतं िरक्ष नीितय को पिर कृ त करना और रा ट्र के म य िवद्यमान संबंध को मजबतू करना है। 12

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भारतीय अतं िरक्ष िवज्ञान और प्रौधेिगकी सं थान (आईआईएसटी) ित वनंतपरु म)

वािणि यक इकाई यू पेस इिं डया िलिमटेड (एनएसआईएल) की थापना 2019 म भारत सरकार के अतं िरक्ष िवभाग के प्रशासिनक क्षेत्र के अ तगर्त एक कद्रीय सावर्जिनक क्षेत्र के उद्यम के प म की गई। इस पहल की पिरक पना घरे लू और वैि क दोन ग्राहक को भारतीय अतं िरक्ष कायर्क्रम से प्रा उ पाद और सेवाओ ं की पेशकश करने के यापक ल य के साथ की गई। इसके अितिरक्त, एनएसआईएल को भारतीय उद्योग के िवकास को प्रो सािहत करने के िलए बनाया गया था, जो इसे अतं िरक्ष से संबंिधत गितिविधय के क्षेत्र म जिटल तकनीकी चनु ौितय का सामना करने के िलए प्रो सािहत करता है। एनएसआईएल प्रमख ु प से उपग्रह के िविभ न प्रकार और वग के िनमार्ण और कक्षा तगर्त िवतरण, अतं िरक्ष-आधािरत सच ं ार और पृ वी अवलोकन सेवाएं प्रदान करने के िलए उपग्रह के वािम व और संचालन, ग्राहक की मांग को परू ा करने के िलए भारतीय उद्योग के सहयोग से प्रक्षेपण वाहन के िवकास, भारतीय और अतं रार् ट्रीय दोन ग्राहक के िलए प्रक्षेपण सेवाओ ं के प्रावधान म शािमल है। और अ य काय के अलावा भारतीय उद्योग को प्रौद्योिगकी ह तांतरण की सिु वधा प्रदान करना। एनएसआईएल सिक्रय प से िविवध उपग्रह प्रकार और उनके उप-प्रणािलय के िनमार्ण और कक्षा तगर्त िवतरण म सल ं ग्न है, जो घरे लू और अतं ररा ट्रीय दोन प्रकार के ग्राहक की सेवा करता है। इसके अितिरक्त, यह भारतीय अतं िरक्ष अनसु ंधान संगठन (इसरो) के िसद्ध प्रक्षेपण वाहन का लाभ उठाकर अपने ग्राहक को अतं िरक्ष प्रक्षेपण सेवाओ ं का िव तार करता है। एनएसआईएल का यापक उ े य अतं िरक्ष आधािरत सेवाओ ं के मा यम से अतं िरक्ष प्रौद्योिगकी और इसके अनप्रु योग को जमीनी तर पर लाना है। एनएसआईएल कंपनी संचार उपग्रह के मा यम से अतं िरक्ष-आधािरत सेवाएं प्रदान करने, टेलीिवजन प्रसारण, डायरे क्ट-टू-होम (डीटीएच) सेवाओ,ं बहुत छोटे एपचर्र टिमर्नल (वीएसएटी)

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कनेिक्टिवटी, ब्रॉडबड सेवाओ,ं संचार बैकहॉल, इन- लाइट कनेिक्टिवटी सेवाओ ं और िडिजटल उपग्रह समाचार संग्रहण (डीएसएनजी) ऑपरे टर के िलए सेवाओ ं जैसे अनप्रु योग को परू ा करने म मह वपणू र् भिू मका िनभाती है। इसके अितिरक्त, एनएसआईएल प्राकृ ितक संसाधन , शहरी िनयोजन और समग्र सामािजक-आिथर्क िवकास के प्रबंधन से सबं ंिधत अनप्रु योग के िलए पृ वी अवलोकन उपग्रह का लाभ उठाता है।

चद्रं यान हम सभी इसरो की गितिविधय से अ छी तरह पिरिचत ह। आजकल चद्रं यान के बारे म जाग कता और बहुत उ साह है - छात्र िमलजल ु कर एक वर म अपनी बात रखते ह। अब तक ऐसे िकतने अिभयान का पता लगाया गया है? छात्र के उ साह को देखते हुए, िशक्षक उ ह और प्रो सािहत करता है। चंद्रयान-1: भारत का पहला चंद्र अिभयान

चद्रं मा पर पानी की मौजदू गी के बारे म पनु : िदलच पी उ प न करने का ये चद्रं यान-1 को िदया जाता है।

22 अक्तूबर, 2008 को सतीश धवन अतं िरक्ष कद्र, ीहिरकोटा से चद्रं यान-1 सफलतापवू र्क प्रक्षेिपत िकया गया। यह अतं िरक्ष यान 100 िक.मी. की ऊंचाई पर एक कक्षा म चद्रं मा की पिरक्रमा करता रहा, जो चद्रं सतह के रासायिनक, खिनज और फोटो-भगू िभर्क मानिचत्रण जैसे मह वपणू र् काय का संचालन करता है। अतं िरक्ष यान म 11 वैज्ञािनक उनकरण लगे हुए थे, िजसम भारत, सयं क्त ु रा य अमेिरका, िब्रटेन, जमर्नी, वीडन और बु गािरया सिहत देश ने 14

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योगदान िदया था। इस अिभयान म प्रयक्ु त मनू इ पैक्ट प्रोब (एमआईपी) ने चद्रं मा के दिक्षणी ध्रवु के आसपास पानी की उपि थित के संकेत प्रदान िकए। इस शोध ने भारत को चद्रं अिभयान आगे बढ़ाने के िलए प्रेिरत िकया। अिभयान ने एक वषर् के अ तगर्त अपने अिधकांश ल य को प्रा िकया। मई 2009 म इसकी कक्षा को 200 िक.मी. तक बढ़ा िदया गया था। 29 अग त, 2009 को अतं िरक्ष यान के साथ सचं ार खोने के बाद िमशन को समा मान िलया गया। चंद्रयान-2: एक तकनीकी सफलता चद्रं यान-1 अिभयान की उ लेखनीय सफलता के बाद भारत चद्रं अ वेषण म आगे बढ़ा। चद्रं यान-2, वषर् 2019 म प्रक्षेिपत िकया गया, िजसम इसरो और अतं ररा ट्रीय अतं िरक्ष सं था के िपछले अिभयान की तल ु ना म एक मह वपणू र् तकनीकी सफलता को इस अथर् म दशार्या गया िक इसका उ े य चद्रं मा के दिक्षणी ध्रवु पर सॉ ट लिडंग और वैज्ञािनक अ वेषण क्षमताओ ं का प्रदशर्न करना है। इसम एक ऑिबर्टर, लडर िवक्रम और रोवर प्रज्ञान को एक साथ लाया गया, िजसका ल य चद्रं मा के न के वल एक क्षेत्र बि क सभी क्षेत्र की खोज करना है, िजसम चद्रं मा के एक्सो फीयर, सतह और उप-सतह को जोड़ना और साथ ही एक ही िमशन म इन-िवट्रो अवलोकन के मा यम से चद्रं के दिक्षणी ध्रवु का अ ययन करना चद्रं यान-2 आिं बर्टर खिनज के िलए च द्रमा का मानिचत्र है। चद्रं मा की उ पि और िवकास का पता लगाने के िलए चद्रं मा की सतह का यापक मानिचत्रण आव यक था। इसके अितिरक्त, चद्रं यान-1 द्वारा खोजे गये जल के अणओ ु ं के सा य के िलए सतह पर, सतह के नीचे और सू म चद्रं वातारण म जल के अ ाुओ ं के िवतरण के अ ययन की आव यकता है । 22 जल ु ाई, 2019 को, इसरो ने अपने सबसे शिक्तशाली लॉ च वाहन रॉके ट, GSLVMK III-M1 को इजं ेक्ट करने के िलए चद्रं यान-2 अपनी प्रारंिभक पृ वी की कक्षा म िनयोिजत िकया। इसके प चात,् इसके प्रक्षेपवक्र को ऊंचा करने के िलए पवू ार् यास की एक ंृखला िन पािदत की गई। 14 अग त, 2019 को, ट्रांस लनू र इसं शर्न (टीएलआई) के बाद, अतं िरक्ष यान पृ वी की कक्षा से मक्त ु हो गया और एक प्रक्षेपवक्र पर चला गया जो इसे चद्रं मा की ओर ले गया। चद्रं यान- 2, 20 अग त, 2019 तक सफलतापवू र्क चद्रं कक्षा म चला गया था, जहां इसने 100 िक.मी. की ऊंचाई पर चद्रं मा का चक्कर लगाया था। इसकी लनू र सॉ ट लिडंग की तैयारी म 2 15

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िसतंबर 2019 को िवक्रम लडर को ऑिबर्टर से अलग कर िदया गया था। इसके बाद, िवक्रम लडर के िलए अपनी कक्षा को समायोिजत करने और इसे चद्रं मा के चार ओर एक गोलाकार पथ म ि थत करने के िलए दो डी-ऑिबर्ट पवू ार् यास िकए गए, िजसम 100 िकलोमीटर से 35 िकलोमीटर तक की ऊंचाई बनाए रखी गई। िवक्रम लडर की लिडंग योजना के अनसु ार हुई, 7 िसतंबर, 2019 को सबु ह-सबु ह लिडंग हुई। परू ा देश इस ऐितहािसक घटना का इतं जार कर रहा था। हमारे प्रधानमत्रं ी, ी नरद्र मोदी, और अतं िरक्ष िवज्ञान और अनसु ंधान के अनेक गणमा य यिक्त बगलु म इसरो टेलीमेट्री, ट्रैिकंग और कमांड नेटवकर् (आईएसटीआरएसी) कद्र म इतं जार कर रहे थे। लडर िवक्रम 2.1 िक.मी. की ऊंचाई तक पहुचं ने तक सामा य प से प्रदशर्न कर रहा था। दभु ार्ग्य से, इस िबंदु पर लडर और बगलु म ग्राउंड टेशन के बीच सचं ार खो गया था और लडर की हाडर् लिडंग मान ली गई थी। यह भारत के अतं िरक्ष कायर्क्रम म एक ऐितहािसक िबंदु था, क्य िक प्रधानमत्रं ी ने इस पर भी इसरो वैज्ञािनक को अिभयान म उनके प्रयास के िलए बधाई दी और प्रो सािहत िकया और चद्रं सॉ ट लिडंग और अ य अिभयान के प्रक्षेपण का िवक प चनु ने के िलए भारत सरकार ने पणू र् समथर्न िदया। इस बीच, ऑिबर्टर, िजसे उसकी इि छत चद्रं कक्षा म रखा गया था, ने चद्रं मा के इितहास के बारे म हमारे ज्ञान का िव तार करने और चांद के ध्रवु ीय क्षेत्र म खिनज और पानी के अणओ ु ं के िवतरण का मानिचत्रण करने म मह वपणू र् भिू मका िनभाई। आठ उ नत वैज्ञािनक

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उपकरण से ससु ि जत, ऑिबर्टर का कै मरा आज तक के िकसी भी चद्रं अिभयान का उ चतम-िवभेदन कै मरा (0.3 मीटर के िवभेदन के साथ) िविश है। आशा है इस कै मरे की उ च-िवभेदन छायािचत्र के वैि क वैज्ञािनक समदु ाय के िलए बहुमू य ह गी। ऑिबर्टर को मल ू प से एक साल के अिभयान के िलए योजनाबद्ध िकया गया था। इसरो के सटीक प्रक्षेपण और अिभयान प्रबंधन के िलए ध यवाद, ऑिबर्टर अभी भी पिरचालन म है (िसतंबर 2023), और वा तव म, इसका पिरचालन संबंधी जीवनकाल अब 2026 तक बढ़ा िदया गया है। चंद्रयान-3 : प्रो नत चंद्र अ वेषण चद्रं यान-2 िमशन को लगे झटके के बाद, इसरो अब चद्रं मा की सतह पर सरु िक्षत लिडंग और घमू ने के िलए अपनी एडं -टू-एडं क्षमता का प्रदशर्न करने म सफल हो गया है। इस अतं िरक्ष यान को 14 जल ु ाई, 2023 को एसडीएससी-एसएचएआर से भारत के सबसे भारी रॉके ट, एलवी माकर् -3 एम 4 पर लॉ च िकया गया था। पवू र्वतीर् अिभयान से सीखते हुए, इस अिभयान की सफलता सिु नि चत करने के िलए िवफलता-आधािरत कायर्नीितय पर यान किद्रत करने की क्षमता के साथ िनिमर्त िकया गया था। ऑिबर्टर के प म चद्रं यान-2 अभी भी संचालन म है, इस िमशन म कोई ऑिबर्टर नहीं था; इसके बजाय, इसम पवू र्वतीर् ऑिबर्टर से प्रा आक ं ड़ का उपयोग िकया गया। इसम के वल दिक्षणी ध्रवु पर सॉ ट-लिडंग के िलए एक लडर और चद्रं मा की सतह का अ ययन करने के िलए एक रोवर था। लिडंग क्षेत्र का िव तार िकया गया था, िजससे लडर को 4 िक.मी. x 2 िक.मी. के क्षेत्र के अदं र सरु िक्षत प से छूने की अनमु ित िमली, पवू र्वतीर् के मामले के िवपरीत, जहां यह 500 मीटर x 500 मीटर था।

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चंद्रयान-3: पेलोड चद्रं यान-3 म एक वदेशी प्रणोदन मॉड्यल ू , एक लडर मॉड्यल ल ू और एक रोवर शािमल था, िजसका उ े य इटं र लेनेटरी अिभयान के िलए आव यक नई प्रौद्योिगिकय काा िवकास और प्रदशर्न करना था। प्रणोदनन मॉड्यल ू ने लडर और रोवर िव यास कोो 153 िक.मी. x 163 िक.मी. की चद्रं कक्षाा म पहुचं ाया। यह एक बॉक्स जैसी संरचनाा क है, िजसम एक बड़ा सौर पैनल और एक इटं रमॉड्यल के ू र एडा टर शक ं ु है, जो लडर क िलए एक माउंिटंग संरचना के प म काम करता है। इसके अलावा, प्रणोदन मॉड्यल ू ने एक शेप पेलोड भी ले िलया।

चद्रं यान-3 के तीन मख्ु य घटक ह: प्रोप शन मॉडउउयल ू , िवक्रम लडर और प्रज्ञान रोवर

िवक्रम लडर मॉड्यल ू को चद्रं मा की सतह पर सॉ ट-लिडंग के िलए िनिमर्त िकया गया था। इसम चार लिडंग पैर और चार लिडंग थ्र टसर् के साथ एक बॉक्स जैसी सरं चना भी थी। यह प्रज्ञान रोवर और साइट पर िव े षण के िलए िविभ न वैज्ञािनक उपकरण को ले गया।

चद्रं यान-3 ने पहली बार ISTRAC, बंगलु के ग्राउंड टेशन से सपं कर् िकया और 6 अग त,2023 को चद्रं कक्षा म प्रवेश के समय देखी गई च द्रमा की त वीर

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चद्रं यान-3 की समय तािलका और प्रक्षेपण िववरण 6 जल ु ाई

7 जल ु ाई 11 जल ु ाई 14 जल ु ाई 15 जल ु ाई 17 जल ु ाई

एसडीएससी, ीहिरकोटा के दसू रे लॉ च पैड से 14 जल ु ाई, 2023 को दोपहर 2.35 बजे (भारतीय मानक समय) प्रक्षेपण िनधार्िरत। सभी िवद्यतु वाहन परीक्षण परू े हो गए ह। लॉ च िरहसर्ल सफलतापवू र्क परू ा िकया गया। LVMIII-M4 का उपयोग करते हुए, चद्रं यान 3 पृ वी की कक्षा म सटीक और सफलतापवू र्क लॉ च िकया गया था। कक्षा को ऊपर उठाने का पहला पवू ार् यास आईएसटीआरएसी म 15 जल ु ाई को 41762 िक.मी. x 173 िक.मी. पृ वी की कक्षा म िकया गया था। दसू रा पवू ार् यास 41603 िक.मी. x 226 िक.मी. कक्षा म िकया गया था।

22 जल ु ाई

कक्षा को ऊपर उठाने का तीसरा पवू ार् यास पृ वी की कक्षा म 71351 िक.मी. x 233 िक.मी. म हुआ।

25 जल ु ाई

अितिरक्त कक्षा-उ थान प्रयास िकया गया।

1 अग त

अतं िरक्ष यान को 288 िक.मी. x 369328 िक.मी. ट्रांसलनू र कक्षा म प्रिव ट कराया गया ।

5 अग त

अतं िरक्ष यान को चद्रं कक्षा (164 िक.मी. x 18074 िक.मी.) म प्रिव ट कराया गया ।

6 अग त

चद्रं यान -3 ने आईएसटीआरएसी म ग्राउंड टेशन के साथ सचं ार िकया और चद्रं मा की कक्षा म प्रवेश के दौरान देखे गए चद्रं मा की त वीर भेजीं और अतं िरक्ष यान 170 िक.मी. x 4313 िक.मी. कक्षा म चद्रं मा के करीब पहुचं गया।

9 अग त

अतं िरक्ष यान की कक्षा 174 िक.मी. x 1437 िक.मी. पर िनचली चद्रं कक्षा म कम हुई।

14 अग त

अतं िरक्ष यान की कक्षा लगभग गोलाकार (151 िक.मी. x 179 िक.मी.) हो गई। चद्रं यान -3 को 153 िक.मी. x 163 िक.मी. पर एक और िनचली चद्रं कक्षा म प्रिव ट कराया गया गया । लडर मॉड्यल ू 153 िक.मी. x 163 िक.मी. चद्रं कक्षा म प्रणोदन रॉके ट मॉड्यल ू से अलग हो गया। लडर मॉड्यल ू ने 113 िक.मी. x 157 िक.मी. पर अपनी कक्षा को कम िकया।

16 अग त 17 अग त 19 अग त 20

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20 अग त 23 अग त

लडर मॉड्यल ू ने 25 िक.मी. x 134 िक.मी. पर अपनी कक्षा को और कम िकया । लडर भारतीय समयानसु ार शाम छह बजकर चार िमनट पर चद्रं मा की सतह पर सॉ ट लिडंग करे गा। भारत चद्रं मा पर पहुचं ने वाला चौथा और चद्रं मा के दिक्षणी ध्रवु पर सॉ ट-लिडंग करने वाला पहला देश बन गया।

24 अग त

रोवर प्रज्ञान लडर से नीचे उतरा और इस तरह भारत ने चद्रं मा पर सैर की।

27 अग त

िवक्रम लडर पर सीएचएसटीई पेलोड से पहला अवलोकन आईएसटीआरएसी म प्रा हुआ था। एलआईबीएस ने प प्रयोग के मा यम से चद्रं मा की सतह पर स फर की उपि थित की पिु की। प्रज्ञान रोवर पर एपीएक्सएस ने लघु त व की उपि थित का पता लगाया

28 अग त 30 अग त 31 अग त 4 िसतंबर

आईएलएसए लिडंग साइट के आसपास की गितिविधय को सनु ता है; और चद्रं यान -3 पर रंभा-एलपी सतह ला मा सामग्री के पास मापता है। लडर और रोवर लीप मोड म ह। सौर ऊजार् संचािलत बैटरी परू ी तरह से इस उ मीद के साथ चाजर् की जाती है िक यह 22 िसतंबर को जाग जाएगी, लेिकन यह अभी तक नहीं हो सका है।

परू ी दिु नया ने 23 अग त, 2023 को शाम 6.04 बजे (आईएसटी) चद्रं मा के दिक्षणी ध्रवु पर िवक्रम लडर की सॉ ट लिडंग देखी। यह कायर्क्रम इतना च काने वाला था िक इसके प्रसारण और लाइव ट्रीिमगं को िरकॉडर् संख्या म दशर्क द्वारा देखा गया था। हमारे प्रधानमत्रं ी मोदी भी इस कायर्क्रम के साक्षी बने, हालांिक वे उस समय दिक्षण अफ्रीका म िब्रक्स बैठक म भाग ले रहे थे। चांद पर लडर की सफल सॉ ट लिडंग पर उ ह ने इसरो को प्रेिरत िकया और बधाई दी। बाद म, उसी िदन, िवक्रम ने ग्राउंड टेशन को एक सदं श े भेजा: “म अपनी मिं जल पर पहुचं गया और तमु भी!”

23 अग त 2023 ही क्य ? िवद्यािथर्य ने चद्रं यान िमशन के बारे म सीखा है । इसी तरह अब वे यह जानने समझने के िलए उ सक ु ह िक 23 अग त ही क्य ? आइए हम जाँच करने का प्रयास कर! पृ वी पर, हमारे पास 24 घटं े का एक िदन है। ऐसा इसिलए है क्य िक पृ वी 24 घटं े म एक चक्कर परू ा करती है। हालांिक, ि थित समान नहीं है। इसे एक चक्कर परू ा करने म लगभग 14 पृ वी िदन लगते ह। तारीख, 23 अग त, 2023, चद्रं िदवस (14 पृ वी िदन के बराबर) की शु आत को िचि त करती है। इसिलए चद्रं यान-3 इसे 23 अग त, 2023 को लड करने के िलए 21

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चद्रं यान उ सव

प्रोग्राम िकया गया था, क्य िक तभी दिक्षणी ध्रवु की ओर चद्रं मा का अपना िदन शु होता है। इस समय अतं िरक्ष यान को अपनी बैटरी चाजर् करने और िनिदर् काय को करने के िलए सयू र् के प्रकाश का उपयोग करने म मदद िमलेगी। चद्रं मा के दिक्षणी ध्रवु पर 7 िसतंबर से 22 िसतंबर तक का सबसे अधं कार वाला समय था। दिक्षणी ध्रवु पर अगला सयू दय 22 िसतंबर, 2023 को होना था। वैज्ञािनक उ मीद कर रहे थे िक िवक्रम और प्रज्ञान तब अपनी नींद से बाहर आएगं े और िफर से ग्राउंड टेशन के साथ संवाद करना शु कर दगे। हालांिक, ऐसा नहीं हो सका। िमशन अभी तक बंद नहीं हुआ है!

रा ट्रीय अतं िरक्ष िदवस भारत की सफलता और इसरो की उपलि धय से उ सािहत चद्रं यान-3 दिक्षण अफ्रीका और ग्रीस से दो देश की यात्रा के बाद वदेश लौटते समय प्रधानमत्रं ी नरद्र मोदी ने इसरो के वैज्ञािनक से यिक्तगत प से िमलने के िलए पहले बगलु जाने का फै सला िकया। उ ह ने इससे जड़ु े सभी लोग को बधाई दी। चद्रं यान िमशन और आगामी सौर आिद य-एल-1 के िलए सरकार को परू ा समथर्न िदया । इसरो के वैज्ञािनक के साथ अपनी बैठक के दौरान, प्रधान मत्रं ी मोदी ने 23 अग त को 'रा ट्रीय अतं िरक्ष िदवस' के प म घोिषत िकया। हर साल चद्रं मा के दिक्षणी ध्रवु पर िवक्रम लडर की सफल सॉ ट लिडंग के उपल य म इसे मनाया जाएगा। प्रधानमत्रं ी नरद्र मोदी ने आईएसटीआरएसी की अपनी यात्रा के दौरान उन थल को “िशवशिक्त वांइट” नाम िदया जहां िवक्रम लडर (चद्रं यान -3 िमशन) ने 23 अग त, 2023 को अपनी सॉ ट लिडंग के बाद चद्रं मा की सतह को छुआ था। उ ह ने यह भी उ लेख िकया िक िजस क्षेत्र म चद्रं यान -2 लडर 22

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भारत का अतं िरक्ष िमशन: चद्रं यान

दभु ार्ग्य से 6 िसतंबर, 2019 को दघु टर् नाग्र त हो गया था, उसे अब “ितरंगा पॉइटं ” के नाम से जाना जाएगा।

िवक्रम को प्रज्ञान ने देखा 30 अग त, 2023, 07:35 बजे

लडर इमेजर-1 कै मरा द्वारा खीचीं गई प्री और पो ट हॉप रप िचत्र। 25-08-2023 को रप ि थित

पो ट हॉिपंग के बाद 03-09-2023 को रप तैनाती ि थित

(िचत्र ोत: www.isro.gov.in)

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चद्रं यान उ सव

बहुत अ छा! बहुत समय के बाद मझु े सामा य प से अतं िरक्ष क्ष िमशन और िवशेष प से चद्रं यान के बारे म जानने को िमला । यहह िववरण इतना रोचक रहा है िक हम पता ही नहीं चला िक िकतनाा समय बीत गया। छात्रा सनु ीता ने उ सािहत होकर कहा, “म आगेग चलकर वैज्ञािनक शोध क ं गी। परू ी कक्षा ने उसके वर म वरर िमलाते हुए हामी भरी। (सभी आरे ख www.isro.gov.in से िलए गए ह)

गितिविध-2 अपना खुद का रॉके ट बनाएं आव यक सामग्री एक 1.5 / 2 लीटर की सक ं री गदर्न वाली खाली बोतल, िसरका (100–200 एमएल), बेिकंग सोडा (1–2 टेबल च मच), एक फ़नल, एक कॉकर् , कुछ िटशू पेपर, और एक ट्राइपॉड टड।

प्रिक्रया

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एक खाली बोतल ल और एक फ़नल की मदद से उसम 100–200 िमलीलीटर िसरका डाल। बोतल म बेिकंग सोडा 1–2 टेबल च मच डाल और कॉकर् और िटशू पेपर की मदद से ज दी से बोतल के खल ु महँु को बंद (कसकर) कर। बोतल को उ टा घमु ाएं (जमीन की ओर खोल) और इसे ट्राइपॉड टड पर रख।

सावधानी: आप सेटअप से कुछ दरू ी पर चले जाएं और एिसड-बेस प्रितिक्रया होने द। प्रितिक्रया के पिरणाम व प, काबर्न डाइऑक्साइड (CO2) गैस बनती है। यह गैस बोतल पर ऊपर की ओर दबाव डालती है और इसे हवा म लॉ च करने के िलए पयार् बल उ प न होता है। 24

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अक्तबू र 2023 अि न 1945 PD 1T RPS

© रा ट्रीय शैिक्षक अनुसध ं ान और प्रिशक्षण पिरषद् 2023

िवषय

चंद्रयान उ सव

1.0

1.1

एफ

हमारा चद्रं यान

1.2

पी

मेरा यारा चदं ा: रानी की खोज

1.3

एम

चद्रं मा पर भारत का अिभयान

1.4

एस

चद्रं यान: चद्रं मा की ओर यात्रा

1.5

एस

1.6

एस

भारत के चद्रं िमशन की खोज चद्रं मा की ओर और उससे आगे

1.7

एस

भारत का चद्रं िमशन: चद्रं यान-3 को जान

1.8

एचएस

चद्रं मा पर भारत

1.9

एचएस

भारत का अतं िरक्ष िमशन: चद्रं यान

1.10 एचएस

चद्रं यान-3 की भौितकी

अपना चद्रं यान से संबंिधत गितिविधय म भाग लेने के िलए: िविजट कर: www.bhartonthemoon.ncert.gov.in प्रकाशन प्रभाग म सिचव, रा ट्रीय शैिक्षक अनुसंधान और प्रिशक्षण पिरषद,् ी अरिवंद मागर्, नई िद ली 110 016 द्वारा प्रकािशत तथा गीता ऑफ़सेट िप्रंटसर् प्रा. िल., सी–90, एवं सी–86, एवं सी-86, ओखला इडं ि ट्रयल एिरया, फे ़ज़–I, नई िद ली 110 020 द्वारा मिु द्रत ।

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अिधक जानकारी के िलए: ईमेल: [email protected] पीमईिवद्या आईवीआरएस: 8800440559

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कोड

1.9 एचएस

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